छह समुद्री यात्राएँ समुद्र के किनारे बसे छोटे से शहर नीलपुर में एक लड़की रहती थी, जिसका नाम था तारा। नीलपुर कोई बहुत बड़ा शहर नहीं था, लेकिन वहां के लोगों की आंखों में समुद्र जितने बड़े सपने रहते थे। सुबह होते ही मछुआरों की नावें नीली लहरों पर दूर निकल जातीं, शाम होते ही बच्चे रेत पर घर बनाते, और रात को बूढ़े लोग समुद्र की ओर देखकर पुरानी कहानियां सुनाते। हर कहानी में कोई न कोई रहस्य होता—कभी जलपरी, कभी बोलने वाला कछुआ, कभी चांदनी से बना जहाज़, तो कभी ऐसी लहर जो इंसान की सबसे प्यारी याद वापस ला सकती थी। तारा को बचपन से समुद्र से प्यार था। वह घंटों किनारे बैठकर लहरों की आवाज़ सुनती रहती। उसे लगता जैसे हर लहर कोई संदेश लेकर आती है, बस मन शांत होना चाहिए उसे सुनने के लिए। उसके नाना, जिन्हें सब कप्तान नीलकंठ कहते थे, एक समय बड़े समुद्री यात्री थे। उन्होंने दुनिया के कई समुद्र देखे थे—अरब सागर की सुनहरी हवाएं, बंगाल की खाड़ी के चंचल तूफान, हिंद महासागर की गहराइयां, प्रशांत महासागर के रहस्यमय द्वीप, अटलांटिक की लंबी रातें और उत्तर के ठंडे जल जहां आकाश खुद पानी में उतर आता है। लेकिन अब ...
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