श्मशान का तांत्रिक (The Cemetery Tantrik) वाराणसी से लगभग पचास किलोमीटर दूर गंगा के किनारे एक प्राचीन श्मशान था, जिसे लोग कालभैरव श्मशान के नाम से जानते थे। दिन में वहाँ अंतिम संस्कार होते थे, लेकिन जैसे ही सूरज डूबता, पूरा इलाका वीरान हो जाता। गाँव के लोग कहते थे कि अमावस्या की रात उस श्मशान में एक तांत्रिक आता है, जो मृतकों को वापस लाने की कोशिश करता है। लेकिन जो लौटकर आता है, वह कभी वही इंसान नहीं होता। बुज़ुर्गों के अनुसार, वर्षों पहले एक तांत्रिक अपनी पत्नी और छोटे बेटे को महामारी में खो बैठा था। शोक ने उसे पागल कर दिया। उसने मृत्यु को स्वीकार करने के बजाय उसे चुनौती देने का फैसला किया। कहते हैं कि उसने श्मशान को अपना घर बना लिया और जीवन-मृत्यु के रहस्यों की खोज में वर्षों तक भटकता रहा। एक अमावस्या की रात वह अचानक गायब हो गया। किसी ने उसका शव नहीं देखा। लेकिन उसके बाद से हर अमावस्या को श्मशान में दूर कहीं धीमी घंटियों की आवाज़ सुनाई देने लगी। और फिर... मिट्टी के नीचे दबी कब्रों से फुसफुसाहट आने लगी। दिल्ली का खोजी पत्रकार विवेक शर्मा ऐसी रहस्यमयी घटनाओं पर डॉक्यूमेंट्री बन...
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