शैतान के जंगल से गुजरती आधी रात की ट्रेन रात के 11 बजकर 47 मिनट पर जब ट्रेन नंबर 3097 ने पुराने कालवन जंगल की सीमा में प्रवेश किया, तब किसी भी यात्री को अंदाजा नहीं था कि वे भारत की सबसे भुला दी गई रेलवे लाइन पर अपनी जिंदगी की सबसे डरावनी यात्रा शुरू कर चुके हैं। ट्रेन का नाम था “अमृतपुर पैसेंजर”। यह कोई मशहूर ट्रेन नहीं थी। न इसमें चमकदार कोच थे, न बड़े शहरों की भीड़। यह बस छोटे कस्बों और गांवों को जोड़ने वाली एक पुरानी ट्रेन थी, जिसमें किसान, छात्र, मजदूर, दुकानदार और कुछ थके हुए यात्री सफर कर रहे थे। उस रात बारिश तेज थी। मुख्य रेलवे लाइन पर भूस्खलन हो गया था, इसलिए कंट्रोल रूम ने ट्रेन को एक पुराने वैकल्पिक रूट से भेजने का फैसला किया। वह रूट कई सालों से बंद पड़ा था। उसका नाम था—कालवन लाइन। रेलवे के कागजों में वह लाइन अब भी मौजूद थी, लेकिन लोग उसे “शैतान का जंगल” कहते थे। कहा जाता था कि उस जंगल में रेल की पटरियां रात में अपने आप आवाज करती हैं, जैसे कोई अदृश्य ट्रेन अब भी उन पर दौड़ती हो। पुराने ड्राइवर उस रूट से गुजरने से मना कर देते थे। बुजुर्ग गार्ड कहते थे कि कालवन लाइन पर एक स्टे...
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