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जब दुनिया खत्म होने की कगार पर पहुंची, तब किसी को नहीं पता था कि एक शहर ऐसा भी बचेगा जो बाकी पूरी पृथ्वी से अलग हो जाएगा।
उस शहर का नाम था—“निरव नगर”।
शुरुआत में यह शहर बिल्कुल सामान्य था। ऊंची इमारतें, चमकती सड़कें, दौड़ती ट्रेनें और हमेशा की तरह भागती जिंदगी। लेकिन फिर एक दिन सब कुछ बदल गया।
सुबह 6:42 बजे शहर के बाहर की सभी सड़कें अचानक गायब हो गईं।
जैसे किसी ने शहर को दुनिया से काट दिया हो।
पहले लोगों को लगा कि यह कोई बड़ा भूकंप या तकनीकी खराबी है, लेकिन जब हेलीकॉप्टर भेजे गए तो वे शहर की सीमा तक पहुंचकर अचानक गायब हो गए।
किसी को समझ नहीं आया कि हो क्या रहा है।
कुछ घंटों बाद सरकार ने शहर को “नो-एंट्री ज़ोन” घोषित कर दिया।
लेकिन अजीब बात यह थी कि शहर के अंदर के लोग बाहर नहीं जा सकते थे और बाहर के लोग अंदर नहीं आ सकते थे।
जैसे वह शहर अब किसी और नियम से चल रहा था।
शहर के अंदर सब कुछ ठीक दिख रहा था… लेकिन धीरे-धीरे अजीब घटनाएं शुरू हो गईं।
पहले लोगों की घड़ियां रुकने लगीं।
फिर मोबाइल नेटवर्क खत्म हो गया।
और फिर सबसे डरावनी बात—
लोग गायब होने लगे।
बिना किसी कारण के, बिना किसी आवाज़ के।
एक सुबह एक आदमी अपनी बालकनी में खड़ा था… और अगले ही पल वह हवा में घुल गया।
कोई शव नहीं।
कोई निशान नहीं।
बस खाली जगह।
शहर में डर फैल गया।
वैज्ञानिकों की एक टीम को अंदर भेजा गया, लेकिन वे भी वापस नहीं आए।
सिर्फ एक रिकॉर्डिंग बाहर पहुंची।
उसमें एक वैज्ञानिक कांपती आवाज में कह रहा था—
“यह शहर खत्म नहीं हो रहा… यह किसी और समय में शिफ्ट हो रहा है।”
कुछ दिनों बाद, शहर के अंदर एक युवक को अजीब सपना आने लगा।
सपने में वह देखता था कि शहर के नीचे एक विशाल मशीन चल रही है।
जो समय को खींच रही है।
उसका नाम आरव था।
आरव ने तय किया कि वह इस रहस्य की तह तक जाएगा।
वह शहर के पुराने मेट्रो स्टेशन के नीचे गया, जहां से अजीब ऊर्जा महसूस हो रही थी।
वहां उसने एक छिपा हुआ दरवाजा देखा।
दरवाजा अपने आप खुल गया।
अंदर एक विशाल हॉल था।
जहां हजारों स्क्रीन जल रही थीं।
हर स्क्रीन पर वही शहर दिख रहा था… लेकिन अलग समय में।
कहीं शहर उजड़ चुका था।
कहीं बर्फ में दबा हुआ था।
कहीं पूरी तरह खाली था।
तभी एक आवाज गूंजी—
“तुम समय-चक्र में प्रवेश कर चुके हो।”
आरव घबराकर पीछे मुड़ा।
कोई दिखाई नहीं दिया।
आवाज फिर आई—
“निरव नगर आखिरी शहर नहीं है… यह अंतिम प्रयोग है।”
“प्रयोग?” आरव ने पूछा।
अचानक सामने एक परछाई जैसी आकृति दिखाई दी।
उसने कहा—
“हम यह देख रहे हैं कि जब दुनिया खत्म होती है, तो कौन सा शहर खुद को बचा सकता है।”
आरव को झटका लगा।
“तो बाकी दुनिया?”
“वह पहले ही खत्म हो चुकी है।”
आरव की सांसें तेज हो गईं।
“और हम?”
आकृति ने कहा—
“तुम सिर्फ डेटा हो… जिसे बार-बार चलाया जा रहा है।”
आरव पीछे हट गया।
अचानक स्क्रीन चमकने लगीं।
और हर स्क्रीन पर वही दृश्य आने लगा—
निरव नगर धीरे-धीरे गायब हो रहा था।
जैसे किसी ने उसे मिटा दिया हो।
आरव भागा।
लेकिन हर रास्ता अब उसी हॉल में वापस आ रहा था।
शहर अब एक लूप बन चुका था।
न अंत था… न शुरुआत।
तभी आखिरी बार एक संदेश गूंजा—
“जब आखिरी शहर भी समझ जाएगा कि वह असली नहीं है… तब प्रयोग पूरा होगा।”
आरव वहीं खड़ा रह गया।
और फिर सब कुछ बंद हो गया।
कोई रोशनी नहीं।
कोई आवाज नहीं।
सिर्फ खालीपन।
और बाहर असली दुनिया में, किसी को याद भी नहीं था कि कभी कोई “आखिरी शहर” भी था।
लेकिन कभी-कभी रात में, पुराने रेडियो सिग्नल पर एक आवाज सुनाई देती है—
“निरव नगर अभी भी चल रहा है… बस किसी और समय में।”
और शायद… वह शहर आज भी कहीं मौजूद है।
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