ब्लैकमेलर का पहला प्यार
रात के बारह बज चुके थे। शहर की ऊंची इमारतों में ज्यादातर खिड़कियां अंधेरी हो चुकी थीं, लेकिन एक छोटे से कमरे में अभी भी लैपटॉप की नीली रोशनी जल रही थी। उस रोशनी के सामने बैठा था आरव—एक ऐसा युवक जिसे लोग बाहर से साधारण समझते थे, लेकिन शहर के कई अमीर और ताकतवर लोग उसके नाम से कांपते थे।
आरव कोई बड़ा गुंडा नहीं था। उसके पास न हथियार थे, न कोई गैंग, न कोई राजनीतिक पहचान। उसके पास बस एक चीज थी—लोगों के राज।
और राज, कभी-कभी बंदूक से ज्यादा खतरनाक होते हैं।
आरव दूसरों की कमजोरियां ढूंढता था। किसी के छिपे हुए बैंक ट्रांजेक्शन, किसी की नकली डिग्री, किसी का अवैध रिश्ता, किसी का पुराना अपराध—वह सब खोज निकालता था। फिर एक अनजान ईमेल, एक छोटा-सा मैसेज, और सामने वाले की नींद उड़ जाती थी।
लोग उसे पैसे दे देते थे। कोई पुलिस तक नहीं जाता था, क्योंकि पुलिस तक जाने का मतलब था अपना सच खुद खोल देना।
आरव ने यह रास्ता खुशी से नहीं चुना था। कुछ साल पहले वह एक शांत, ईमानदार और सपनों से भरा लड़का था। वह पत्रकार बनना चाहता था। सच लिखना चाहता था। लेकिन सच की दुनिया में उसे सबसे पहले झूठ ने हराया था।
उसकी जिंदगी में कभी एक लड़की थी—तारा।
तारा उसके कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़की नहीं थी, लेकिन सबसे अलग जरूर थी। उसकी आंखों में ऐसी चमक थी, जैसे वह हर अंधेरे में भी रास्ता खोज लेगी। आरव और तारा एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों ने साथ भविष्य देखा था। आरव पत्रकार बनेगा, तारा वकील बनेगी, और दोनों मिलकर अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे।
लेकिन एक दिन तारा अचानक चली गई।
न कोई लंबी बात, न कोई वजह, न कोई आखिरी मुलाकात। बस एक छोटा-सा मैसेज—
“आरव, मुझे भूल जाना। मैं तुम्हारे लिए अच्छी नहीं हूं।”
आरव ने बहुत कोशिश की। कॉल किए, मैसेज भेजे, उसके घर गया, दोस्तों से पूछा। लेकिन तारा जैसे जमीन में समा गई थी। कुछ महीनों बाद खबर मिली कि तारा ने शहर छोड़ दिया। फिर कोई खबर नहीं।
उसके बाद आरव बदल गया।
जिस लड़के ने सच के लिए लड़ने का सपना देखा था, वह अब लोगों के सच बेचने लगा। प्यार ने उसे तोड़ा था, और टूटे हुए इंसान अक्सर या तो बहुत अच्छे बन जाते हैं या बहुत खतरनाक।
आरव खतरनाक बन गया।
उस रात भी वह एक नए टारगेट की फाइल खोल रहा था। फाइल उसे एक अनजान स्रोत से मिली थी। नाम लिखा था—“प्रोजेक्ट सफेद नकाब।”
फाइल में शहर के बड़े वकीलों, बिजनेसमैन और नेताओं के दस्तावेज थे। आरव ने सोचा, आज रात उसकी किस्मत खुलने वाली है। इतने बड़े राजों से वह महीनों तक पैसा कमा सकता था।
लेकिन जैसे ही उसने तीसरा फोल्डर खोला, उसका हाथ रुक गया।
स्क्रीन पर एक तस्वीर थी।
तारा।
वही आंखें। वही चेहरा। बस अब उसके चेहरे पर पहले वाली मासूमियत की जगह एक अजीब-सी कठोरता आ चुकी थी। फोटो के नीचे नाम लिखा था—
“तारा मेहरा, हाई कोर्ट एडवोकेट।”
आरव की सांस अटक गई।
पांच साल बाद तारा उसके सामने थी—एक फाइल में, एक राज के साथ।
उसने कांपते हाथों से दस्तावेज खोले। उसमें लिखा था कि तारा एक बड़े केस में मुख्य गवाह को बचा रही थी। केस था—मंत्री रुद्र प्रताप सिंह के बेटे वीर का। वीर पर एक लड़की की हत्या का आरोप था, लेकिन सारे सबूत गायब कर दिए गए थे। तारा पीड़ित परिवार की तरफ से केस लड़ रही थी।
लेकिन फाइल में एक और बात थी।
किसी ने तारा के खिलाफ सबूत तैयार किए थे। एक वीडियो, कुछ बैंक ट्रांसफर और एक पुरानी तस्वीर, जिससे यह साबित किया जा सकता था कि तारा ने केस के बदले पैसे लिए हैं और गवाहों को छिपाया है।
अगर ये चीजें बाहर जातीं, तो तारा की वकालत खत्म हो जाती। उसका नाम खत्म हो जाता। केस खत्म हो जाता।
और शायद एक हत्यारा आजाद हो जाता।
आरव ने वीडियो चलाया। वीडियो में तारा एक होटल लॉबी में किसी आदमी से लिफाफा लेती दिख रही थी। लेकिन आरव की नजर तुरंत एक छोटी-सी बात पर गई। वीडियो की टाइमिंग में गड़बड़ थी। दीवार पर लगी घड़ी रात के आठ बजा रही थी, लेकिन फाइल में समय लिखा था रात दस बजे। आवाज अलग से जोड़ी गई लग रही थी।
यह असली नहीं था।
यह किसी ने बनाया था।
लेकिन अगर वह चाहे तो इसी नकली सबूत से तारा को ब्लैकमेल कर सकता था।
पैसा बहुत मिल सकता था।
तारा अब सफल वकील थी। उसके पास नाम था, प्रतिष्ठा थी, शायद पैसा भी था। और सबसे बड़ी बात—वह वही लड़की थी जिसने उसे बिना वजह छोड़ दिया था।
आरव की आंखों में पुराने दर्द की आग जल उठी।
उसने तारा को एक अनजान नंबर से मैसेज भेजा—
“तुम्हारा एक सच मेरे पास है। मिलना है तो कल शाम पुरानी लाइब्रेरी के पीछे आना। अकेली।”
कुछ सेकंड बाद मैसेज पढ़ लिया गया।
जवाब आया—
“कौन?”
आरव ने लिखा—
“तुम्हारे अतीत का वह पन्ना जिसे तुमने फाड़ दिया था।”
इस बार कोई जवाब नहीं आया।
अगली शाम शहर में बारिश की हल्की बूंदें गिर रही थीं। पुरानी लाइब्रेरी के पीछे की गली सुनसान थी। आरव काली जैकेट पहने अंधेरे कोने में खड़ा था। उसके चेहरे पर मास्क था।
तारा आई।
वह पहले जैसी नहीं दिख रही थी। सफेद कुर्ता, काला कोट, हाथ में फाइल, चेहरे पर आत्मविश्वास। लेकिन उसकी आंखों में चिंता साफ थी।
“कौन हो तुम?” उसने सख्त आवाज में पूछा।
आरव अंधेरे से बाहर आया। “तुम्हें सच में नहीं पता?”
तारा ने उसे गौर से देखा। फिर उसका चेहरा पीला पड़ गया।
“आरव…”
उस नाम में पांच साल की दूरी, अधूरी मोहब्बत और अनगिनत सवाल छिपे थे।
आरव ने हल्की हंसी के साथ कहा, “याद है अभी भी?”
तारा की आंखें भर आईं, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया। “तुम यहां क्यों बुला रहे हो?”
“तुम्हारे लिए एक तोहफा है।”
आरव ने मोबाइल पर वीडियो दिखाया। तारा ने वीडियो देखा और उसका चेहरा गंभीर हो गया।
“यह फर्जी है,” उसने तुरंत कहा।
“मुझे पता है,” आरव बोला। “लेकिन दुनिया को पता चलेगा?”
तारा ने उसकी तरफ देखा। “तुम मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो?”
“मैं यही करता हूं अब।”
तारा के चेहरे पर दर्द उभर आया। “तुम ऐसे नहीं थे।”
आरव की आवाज कड़वी हो गई। “तुम भी ऐसी नहीं थीं। तुम तो कहती थीं, हम सच के लिए लड़ेंगे। फिर एक दिन तुम सच बताए बिना चली गईं।”
तारा चुप हो गई।
“क्यों गई थीं?” आरव ने पहली बार वह सवाल पूछा जो पांच साल से उसके भीतर जिंदा था। “क्या मैं इतना बुरा था? या कोई और था?”
तारा ने आंखें झुका लीं। “कुछ बातें बताने से लोग बचते नहीं, टूट जाते हैं।”
“मैं पहले ही टूट चुका हूं।”
तारा ने धीरे से कहा, “तुम नहीं जानते, आरव।”
“तो बताओ।”
तारा कुछ कहती, उससे पहले गली के दूसरे छोर पर एक गाड़ी रुकी। दो आदमी उतरे। तारा ने उन्हें देखा और तुरंत आरव का हाथ पकड़ लिया।
“यहां से चलो।”
आरव चौंका। “क्यों?”
“क्योंकि जिसने तुम्हें वह फाइल भेजी है, वह चाहता है कि तुम मुझे फंसाओ। और अगर तुमने ऐसा नहीं किया, तो अब वह तुम्हें भी खत्म करेगा।”
आरव को पहली बार एहसास हुआ कि खेल उसके हाथ में नहीं था। वह किसी और की चाल में फंस चुका था।
दोनों गली से भागे। पीछे से कदमों की आवाज तेज हो गई। एक आदमी ने चिल्लाकर कहा, “रुको!”
आरव और तारा एक पुराने मकान की दीवार फांदकर दूसरी तरफ कूदे। बारिश तेज हो गई थी। सड़क पर अंधेरा था। तारा ने अपनी कार अनलॉक की, दोनों अंदर बैठे और कार तेजी से निकल गई।
कुछ देर तक दोनों चुप रहे।
फिर आरव बोला, “अब सच बताओ।”
तारा ने गहरी सांस ली। “जिस केस पर मैं काम कर रही हूं, उसमें मंत्री रुद्र प्रताप सिंह का बेटा वीर आरोपी है। जिस लड़की की हत्या हुई, उसका नाम अनन्या था। वह मेरी जूनियर थी। उसने मरने से पहले मुझे एक वीडियो भेजा था। वीडियो में वीर उसे धमका रहा था। लेकिन उसी रात अनन्या मर गई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया।”
“और तुम केस लड़ रही हो।”
“हां। लेकिन रुद्र प्रताप बहुत ताकतवर है। उसने गवाह खरीद लिए, पुलिस रिपोर्ट बदलवाई, पोस्टमार्टम तक बदल दिया। अब वह मुझे भी बदनाम करना चाहता है।”
आरव ने पूछा, “फाइल मेरे पास किसने भेजी?”
“शायद उसके आदमी ने। उन्हें लगा तुम मुझे ब्लैकमेल करोगे। मैं डरकर केस छोड़ दूंगी। अगर नहीं छोड़ती, तो वे तुम्हारे जरिए मेरे खिलाफ सबूत बाहर करवा देते।”
आरव हंसा, लेकिन उसकी हंसी में शर्म थी। “मतलब मैं उनके काम का आदमी था।”
तारा ने उसकी तरफ देखा। “तुम अभी भी उनके काम के आदमी बन सकते हो। या फिर वह आरव बन सकते हो जिसे मैं जानती थी।”
आरव ने खिड़की से बाहर देखा। बारिश शीशे पर बह रही थी। उसे लगा जैसे शहर की सारी रोशनी धुंधली हो गई है।
“तुमने मुझे छोड़ा क्यों था?” उसने फिर पूछा।
तारा ने कार रोक दी।
कुछ पल सन्नाटा रहा।
फिर तारा बोली, “क्योंकि तुम्हारे पिता की मौत हादसा नहीं थी।”
आरव का दिल रुक गया।
उसके पिता, शेखर मल्होत्रा, एक छोटे पत्रकार थे। वे एक रात सड़क दुर्घटना में मारे गए थे। आरव तब कॉलेज में था। उसे हमेशा बताया गया था कि ब्रेक फेल हो गए थे।
“क्या मतलब?” आरव की आवाज भारी हो गई।
तारा की आंखें भर आईं। “तुम्हारे पिता मंत्री रुद्र प्रताप के पुराने जमीन घोटाले की जांच कर रहे थे। उनके पास कुछ सबूत थे। मेरे पिता उस समय रुद्र प्रताप के वकील थे। उन्हें पता था कि शेखर अंकल को रास्ते से हटाया जाएगा। उन्होंने रोकने की कोशिश नहीं की।”
आरव का चेहरा पत्थर जैसा हो गया।
“तुम्हें पता था?” उसने धीमे लेकिन खतरनाक स्वर में पूछा।
“मुझे बाद में पता चला। जब पता चला, मैं तुम्हारे सामने कैसे खड़ी होती? मैं तुम्हें सच बताती तो तुम मेरे पिता को कभी माफ नहीं करते। और शायद खुद को भी तबाह कर लेते।”
“तो तुमने मुझे अकेला छोड़ दिया?”
तारा रो पड़ी। “मैं कमजोर थी, आरव। मैंने गलत किया। लेकिन मैंने तुम्हें बचाने की कोशिश की थी।”
“बचाने?” आरव चिल्लाया। “तुमने मुझे अंधेरे में धकेल दिया!”
तारा ने धीरे से कहा, “मुझे पता है।”
आरव कार से उतर गया। बारिश उसके चेहरे पर गिर रही थी, लेकिन उसकी आंखों में जो दर्द था, उसे कोई बारिश नहीं धो सकती थी।
तारा भी बाहर आई। “आरव, मैं आज भी उस गलती की सजा भुगत रही हूं। लेकिन अभी अनन्या को न्याय दिलाना है। तुम्हारे पिता को भी। मेरे पिता अब जिंदा नहीं हैं, लेकिन मरने से पहले उन्होंने मुझे एक डायरी दी थी। उसमें रुद्र प्रताप के अपराधों का हिस्सा दर्ज है। मैं उसे कोर्ट में पेश करना चाहती हूं, लेकिन डायरी का सबसे जरूरी पन्ना गायब है।”
आरव ने उसकी तरफ देखा। “कौन सा पन्ना?”
“जिसमें तुम्हारे पिता की हत्या का आदेश दर्ज था।”
आरव ने कुछ नहीं कहा। वह वापस कार में बैठ गया।
“कहां चलना है?” तारा ने पूछा।
आरव ने ठंडी आवाज में कहा, “मेरे पास।”
तारा उसे शहर के पुराने इलाके में उसके कमरे तक लेकर गई। आरव ने लैपटॉप खोला और उस फर्जी वीडियो की फाइल की जांच शुरू की। कुछ ही देर में उसे फाइल के मेटाडेटा में एक छिपा हुआ सर्वर लिंक मिला।
“यह वीडियो किसी लोकल स्टूडियो में बनाया गया है,” आरव बोला। “नाम है—मिरर फ्रेम मीडिया।”
तारा ने कहा, “यह रुद्र प्रताप की पार्टी के विज्ञापन बनाता है।”
आरव ने स्क्रीन पर कुछ कोड चलाए, पुराने ईमेल ट्रैक किए और एक क्लाउड बैकअप खोज निकाला। उसमें सिर्फ तारा का फर्जी वीडियो नहीं था। कई और लोगों के नकली वीडियो थे—गवाह, पत्रकार, पुलिस अफसर, नेता। यह पूरा ब्लैकमेल सिस्टम था।
आरव ने धीरे से कहा, “ये लोग भी वही करते हैं जो मैं करता हूं… बस बड़े पैमाने पर।”
तारा ने उसकी तरफ देखा। “फर्क यह है कि तुम अब रुक सकते हो।”
आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसी समय उसके फोन पर मैसेज आया—
“फाइल बाहर मत निकालना। नहीं तो तारा की मौत भी आत्महत्या लगेगी।”
साथ में एक फोटो थी। फोटो में तारा के घर का दरवाजा दिखाई दे रहा था।
आरव ने पहली बार सचमुच डर महसूस किया।
“वे तुम्हारे घर पर नजर रख रहे हैं,” उसने कहा।
तारा ने शांत स्वर में जवाब दिया, “वे सालों से रख रहे हैं।”
“तुम डरती नहीं?”
“डरती हूं। लेकिन हर डर के बाद मैं अनन्या की मां का चेहरा याद करती हूं। फिर डर छोटा लगने लगता है।”
आरव उसे देखता रह गया। पांच साल पहले की तारा लौट आई थी—टूटी हुई, पछतावे से भरी, लेकिन भीतर से आग जैसी मजबूत।
रात भर दोनों ने डेटा खंगाला। सुबह तक आरव ने पता लगा लिया कि मिरर फ्रेम मीडिया का असली सर्वर शहर के बाहर एक बंद पड़े थिएटर में चल रहा था। वहां नकली वीडियो, रिकॉर्डिंग, बैंक दस्तावेज और ब्लैकमेल फाइलें रखी जाती थीं।
“हमें पुलिस के पास जाना चाहिए,” तारा ने कहा।
आरव हंस पड़ा। “जिस पुलिस की आधी फाइलें इनके पास ब्लैकमेल के लिए रखी हैं?”
तारा चुप हो गई।
“हमें सबूत चाहिए,” आरव बोला। “ऐसा सबूत जिसे मिटाया न जा सके।”
दोनों रात को उस बंद थिएटर पहुंचे। बाहर से वह जगह खंडहर लग रही थी, लेकिन अंदर नई मशीनें, कैमरे और सर्वर लगे थे। दीवारों पर ग्रीन स्क्रीन थी, मेज पर नकली दस्तावेज, और एक कमरे में कई चेहरों के वीडियो क्लिप।
तारा ने धीरे से कहा, “ये लोग लोगों की जिंदगी एडिट कर देते हैं।”
आरव ने सर्वर से हार्ड ड्राइव निकालनी शुरू की। तभी पीछे से आवाज आई—
“ब्लैकमेलर को ब्लैकमेल करना इतना आसान नहीं होता, आरव।”
दोनों मुड़े।
दरवाजे पर वीर खड़ा था—मंत्री का बेटा। चेहरे पर अहंकार, हाथ में पिस्तौल।
“तुम?” तारा ने गुस्से से कहा। “अनन्या को तुमने मारा था।”
वीर मुस्कुराया। “वह बहुत बोलती थी। तुम्हारी तरह।”
आरव ने धीरे से हार्ड ड्राइव अपनी जैकेट में छिपा ली।
वीर ने कहा, “तुम दोनों को यहां नहीं आना चाहिए था। तारा, तुम्हें केस छोड़ देना चाहिए था। और आरव, तुम्हें अपना पैसा लेकर चुप बैठ जाना चाहिए था।”
आरव ने पहली बार खुद से घृणा महसूस की। सचमुच, वह ऐसा ही तो था—पैसा लेकर चुप हो जाने वाला।
लेकिन इस बार सामने तारा थी। उसके पिता का सच था। अनन्या की मौत थी।
“इस बार नहीं,” आरव ने कहा।
वीर ने पिस्तौल तारा की तरफ तान दी। “तो मरने के लिए तैयार हो जाओ।”
उसी पल थिएटर की स्क्रीन अचानक जल उठी।
विशाल पर्दे पर वीर का चेहरा दिखाई दिया। वही वीडियो जिसमें वह अनन्या को धमका रहा था। फिर दूसरी रिकॉर्डिंग चली—वीर की आवाज, “उसे आत्महत्या दिखाओ।”
वीर घबरा गया। “ये किसने चलाया?”
आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “तुम्हारे सर्वर से लाइव स्ट्रीम शुरू कर दी है। सिर्फ स्क्रीन पर नहीं, कई न्यूज डेस्क, कोर्ट रिपोर्टर और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर।”
वीर ने गोली चलानी चाही, लेकिन तारा ने पास पड़ी लोहे की रॉड से उसके हाथ पर वार किया। पिस्तौल गिर गई। आरव ने उसे धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया।
कुछ ही मिनटों में बाहर पुलिस की आवाजें गूंजने लगीं। इस बार मामला दबाया नहीं जा सकता था। वीडियो सार्वजनिक हो चुका था। वीर गिरफ्तार हो गया। सर्वर जब्त हुआ। नकली वीडियो रैकेट खुल गया।
लेकिन आरव की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई थी।
हार्ड ड्राइव में एक फोल्डर था—“शेखर मल्होत्रा।”
आरव ने कांपते हाथों से उसे खोला। उसमें उसके पिता की आखिरी रिकॉर्डिंग थी। रिकॉर्डिंग में शेखर कह रहे थे—
“अगर मैं वापस न लौटूं, तो मेरे बेटे आरव को बताना कि सच से भागना मत। सच महंगा होता है, लेकिन झूठ आत्मा बेच देता है।”
आरव की आंखों से आंसू बह निकले।
तारा उसके पास बैठ गई। “मुझे माफ कर दो, आरव।”
आरव ने बहुत देर तक कुछ नहीं कहा। फिर बोला, “मैं तुम्हें माफ करना चाहता हूं, लेकिन अभी नहीं कर पा रहा।”
तारा ने सिर झुका लिया। “मैं इंतजार करूंगी।”
“और मैं खुद को भी माफ नहीं कर पा रहा,” आरव ने कहा। “मैं लोगों को उन्हीं राजों से डराता रहा जिनसे मेरे पिता लड़ते थे।”
तारा ने उसका हाथ पकड़ना चाहा, लेकिन फिर रोक लिया। “तो अब लड़ो। सही तरफ।”
अगले कुछ हफ्तों में शहर हिल गया। रुद्र प्रताप सिंह के खिलाफ जांच शुरू हुई। वीर के केस में अनन्या की हत्या का मामला दोबारा खुला। कई पुराने मामलों की फाइलें सामने आईं। मिरर फ्रेम मीडिया का ब्लैकमेल नेटवर्क खुलने से कई बड़े चेहरे बेनकाब हुए।
लेकिन आरव ने खुद भी पुलिस के सामने अपने अपराध स्वीकार किए। उसने उन लोगों की सूची दी जिन्हें उसने ब्लैकमेल किया था। उसने पैसे वापस करने की प्रक्रिया शुरू की और जांच में सहयोग किया।
तारा ने उससे पूछा, “तुम्हें पता है, इससे तुम्हें जेल भी हो सकती है?”
आरव ने शांत स्वर में कहा, “शायद यही मेरी सजा है। और शायद यही मेरी शुरुआत भी।”
कोर्ट में तारा ने अनन्या का केस लड़ा। आरव ने मुख्य डिजिटल गवाह के रूप में बयान दिया। उसने बताया कि फर्जी वीडियो कैसे बनाए गए, कैसे लोगों को डराया गया, और कैसे असली अपराधों को झूठ की परतों में छिपाया गया।
फैसले के दिन कोर्टरूम भरा हुआ था। वीर को दोषी ठहराया गया। रुद्र प्रताप सिंह पर अलग से मुकदमा शुरू हुआ। अनन्या की मां रो पड़ीं। तारा की आंखों में भी आंसू थे।
आरव बाहर खड़ा आसमान देख रहा था। तारा उसके पास आई।
“आज तुमने अपने पिता का सपना पूरा किया,” उसने कहा।
आरव ने धीरे से जवाब दिया, “नहीं। बस उसकी तरफ पहला कदम रखा है।”
तारा ने पूछा, “और हमारे बीच?”
आरव ने उसकी तरफ देखा। “हमारे बीच सच है। दर्द भी है। प्यार भी शायद कहीं बचा है। लेकिन अब मैं झूठ पर रिश्ता नहीं बनाना चाहता।”
तारा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “तो सच से शुरू करते हैं।”
आरव ने कहा, “सच यह है कि मैं तुमसे नफरत करना चाहता था।”
“और?”
“सच यह भी है कि जब तुम्हें खतरे में देखा, तो मुझे समझ आ गया कि प्यार पूरी तरह मरा नहीं था।”
तारा की आंखें नम हो गईं।
“लेकिन प्यार वापस पाने से पहले मुझे खुद को वापस पाना होगा,” आरव ने कहा।
तारा ने सिर हिलाया। “मैं इस बार बिना बताए नहीं जाऊंगी।”
समय बीतने लगा। आरव ने ब्लैकमेल छोड़ दिया। उसने डिजिटल अपराधों की जांच में पुलिस की मदद करनी शुरू की। उसकी पहचान अब भी विवादों से भरी थी, लेकिन धीरे-धीरे लोग उसे एक ऐसे आदमी के रूप में देखने लगे जो अंधेरे से लौटकर रोशनी की तरफ चल पड़ा था।
एक शाम आरव अपने पुराने कमरे में बैठा था। उसने लैपटॉप खोला। स्क्रीन पर एक नया अनजान मेल आया था।
सब्जेक्ट था—“तुम्हारे पिता की आखिरी फाइल अभी भी अधूरी है।”
आरव का दिल तेज धड़कने लगा।
मेल में सिर्फ एक लाइन थी—
“रुद्र प्रताप सिर्फ मोहरा था। असली ब्लैकमेलर अभी भी आजाद है।”
साथ में एक तस्वीर थी।
तस्वीर में आरव के पिता शेखर, तारा के पिता, रुद्र प्रताप और एक चौथा आदमी खड़े थे। चौथे आदमी का चेहरा काला कर दिया गया था।
तस्वीर के नीचे लिखा था—
“पहला प्यार तुम्हें सच तक लाया। अब सच तुम्हें वहां ले जाएगा, जहां से तुम्हारे पिता कभी लौटकर नहीं आए।”
आरव ने स्क्रीन बंद नहीं की। वह लंबे समय तक उस तस्वीर को देखता रहा।
तारा का फोन आया।
“आरव, सब ठीक है?”
आरव ने गहरी सांस ली। “नहीं। कहानी अभी खत्म नहीं हुई।”
“क्या हुआ?”
आरव ने जवाब दिया, “मेरे पिता की मौत के पीछे एक और चेहरा है।”
तारा कुछ पल चुप रही। फिर बोली, “इस बार हम साथ हैं।”
आरव ने खिड़की से बाहर देखा। शहर की रोशनी फिर वही थी, लेकिन अब उसे अंधेरा डराता नहीं था।
क्योंकि इस बार वह ब्लैकमेलर नहीं था।
इस बार वह सच का गवाह था।
और उसका पहला प्यार अब उसकी सबसे बड़ी कमजोरी नहीं, सबसे बड़ी ताकत बनने वाला था।
इसका अगला भाग **“असली ब्लैकमेलर का चौथा चेहरा”** नाम से बनाया जा सकता है।

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